Monday, 22 September 2014

कुछ और....

एक तरफ तू,      एक तरफ मैं
तेरे हालात कुछ और
मेरी हालत  .... कुछ और
तेरी यादों में सिमटी
मेरी तसल्लियाँ
तुझे न पाने  का गम कुछ और
तुझे खोने का  गम कुछ और
तुझे पाकर भी न पा सकी
तेरी मजबूरियाँ कुछ और
मेरी मजबूरियाँ कुछ और
नादान है इश्क ,  नादान है दिल
 पर तेरी फितरत कुछ और , तेरे ज़ज़्बात कुछ और
सिहरन सी देता है तेरा अंदाज़
तेरी यादों के समुन्दर में मेरे नाम का परवाज़
आज भी उड़ता सा लगता है
पर तेरा किनारा कुछ और , मेरा कुछ और
हक़ है ये प्यार  का , अदा करो या न करो   
मेरी ख्वाहिशों का सिला
                    कुछ और
तेरे इंकार की वज़ह
                     कुछ और
 

Many a times...

Many a chance I gave to you
Many a chance you lost
Many a times I thought you cared
Many a times you crossed
Many a things I thought I'll share
Many a things got rot
Many a years I waited for you
Many a years you fought
and finally the day
has come, which says...
I'll have to let you go
As holding will stink the love
And I ...
can't bring ; the epitome to low...

Wednesday, 17 September 2014

अकेला


स्वयं को ढूंढती मैं खुद से हैरान
कभी खुशियों में हंसती
कभी दुःख में परेशान
न जाना क्या पाया
न जाना क्या खोया
हर एक दिन, बस आस ही को बोया
बेजुबां दिल की भाषा
ना किसी ने समझी ना जानी
हर बार अकेला ही
       वो ज़ार ज़ार रोया
                    वो ज़ार ज़ार रोया