Tuesday, 8 April 2014

तुम्हारे संग

तुम्हारे संग 

कितनी दूर तक चलने की चाहत है…… तुम्हारे संग
आसमाँ को छूने की चाहत है…… तुम्हारे संग
बादलों के उड़नखटोले में जहां को देखने की चाहत है ……तुम्हारे संग
गिरती हुई बूदों की टिपटिप कानो में भरने की चाहत है…… तुम्हारे संग
इंद्रधनुष के रंगों से जीवन को सजाने की चाहत है ……तुम्हारे संग
सागर की लहरों से खेलने की चाहत है…… तुम्हारे संग
गीली मिटटी में पैरों के निशाँ बनाने की चाहत है…… तुम्हारे संग
आँखों की बूदों में खुशियां समेटने की चाहत है…… तुम्हारे संग
बहारों के बगीचे में फूल खिलाने की चाहत है ……तुम्हारे संग
पत्तो की सरसराहट में मिल जाने की  चाहत है …… तुम्हारे संग
रूह को महका दे जो उस स्पर्श को पाने की चाहत है ……तुम्हारे संग
हर दिन एक एक पल का अहसास… उसे जीने की चाहत है ……तुम्हारे संग.… 

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