Sunday, 13 November 2016

kabhikabhi

किसी दर्द की तरह तुम आये थे
किसी दर्द की ही तरह तुम चले गए
ना कभी मैंने चाहा तुम आओ
ना कभी की तुम जाओ।
पर उस वक़्त के दरम्या
एक अहसास का समंदर
भर गया मन में
हिलोरे मारता रहता
       जो कभी कभी.....
            जो कभी कभी...


Wednesday, 16 December 2015

maun

किसी मौन ने तोडा था ह्रदय
जब व्यक्त करनी  था तुम्हे
अपने हिय की गाथा
अव्यक्त अभिलाषा समझता नहीं कोई
ह्रदय की पिपासा
बुझाता नहीं कोई
स्वप्न सजीले थे
मधुर स्मृति थी
फिर क्यों मौन
जीवन के परिप्रेक्ष्य को ना
समझ सका
विरहाग्नि से जले दो मन
प्राप्त कुछ भी नहीं
हाय वो मौन शाब्दिक क्यों न बन सका
हाय वो मौन शाब्दिक क्यों न बन सका। ....
 

Sunday, 22 November 2015

hui mai...

तुम्हारे दिल में बसने आई थी
बस गई मैं
तुम्हारा घर सजाने आई थी
संवर गई मैं
तुमको बहार देने आई थी
खिलखिल गई मैं
तुमको प्यार करने आई थी
निखर  गई मैं
तुमको पाकर जिंदगी मुकम्मल
तुम्हारी होकर
खुशनसीब हुई मैं
बहुत खुशनसीब हुई मैं। …। 

Monday, 16 November 2015

tapasvi

शिला पर बैठा एक तपस्वी
ध्यानमे मग्न था
तप की उचाईयों से तप्त
ईश से संलग्न था
मानवीय घटनाक्रम जीवनसे उसके अछूते थे
तट पर बैठा प्यास से दूर
ठंडी एक अगन था
उसके जीवन का ध्येय
निर्वाण की प्राप्ति थी
रास के हरेक रास से विभूत
वो भावमग्न था
धरा पुत्र वो बलिष्ठ
ध्यान में ही मग्न था। ....... 

kyaaa?

क्या आज भी तुम्हारे दिल में
मेरा नाम धड़कता है ?
क्यों सुनाई देती है आवाज़ तुम्हारी मुझको
क्यों तेरे नाम से मेरा तन मन बहकता है ?
मेरी आँखों में ढली शाम की सुरमाई
क्या आज भी बिजली बन तुम पर बरसती है ?
या मेरी हंसी की छनछनाहट
तुम्हारे कानो में अब भी बजती है ?
मेरी यादों के तकिये पे अपना सिर रख तुम जो सोते थे
क्या उस सुकूं में आँख आज भी नम  होती है
वो हाथ पकड़ मेरा जो दिल के तार जोड़ते थे
क्या एक होने की कसक आज भी जाग उठती है ???????

Friday, 21 August 2015

तुम मेरी हो

तुम मेरी हो
क्योंकि
तुम मेरे मन  में  अन्तर्निहित
उस  पहली बूँद  की तरह हो
जो वर्षा के  संग आकर
वसुधा को तृप्त करती है

तुम मेरे भावों में उमड़ी
उस कविता की तरह हो
जो आनंदित करती है
मेरे कवित्व को

तुम मेरी  आँखों में निहित
उस रौशनी की  तरह हो
जैसे बादलों से घिरने के बाद
हलकी ओट से सूरज चमकता हो

तुम मेरी हो
मेरे होने का अस्तित्व
मेरी प्रसन्नता
मेरा आह्लाद
तुम से ही तो है

कभी

कभी समंदर में बसेरा
            कभी उड़ती हवाओं में
कभी पेड़ की डाली
          कभी घूमती फ़िज़ाओं में
कभी तनहा तनहा
         कभी मुस्कुराती
कभी आँख आंसू
      कभी खिलखिलाती
कभी मद्धम  मद्धम
         कभी जोर से … दौड़ जाती
ज़िन्दगी की यही
      बस अपनी कहानी
कभी ऑंखें शबनम
    कभी इनमे पानी