Sunday, 22 November 2015

hui mai...

तुम्हारे दिल में बसने आई थी
बस गई मैं
तुम्हारा घर सजाने आई थी
संवर गई मैं
तुमको बहार देने आई थी
खिलखिल गई मैं
तुमको प्यार करने आई थी
निखर  गई मैं
तुमको पाकर जिंदगी मुकम्मल
तुम्हारी होकर
खुशनसीब हुई मैं
बहुत खुशनसीब हुई मैं। …। 

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