Wednesday, 8 January 2014

बहार

बारिश 

नन्ही सी धूप.....  कितनी खुशियां लाई
बारिश की बूंदों में हरियाली थी छाई
टुकुर टुकुर ताक रहा नन्हा सा मेंढक
खुशबु भरी हवाएं उसे बाहर जो ले आई ....

बहार 

बूंदों में भी एक साज़ है
मन को छू  जाए ऐसी आवाज़ है
बहारों में झूमे कलियाँ मुस्कुरा के
तिनके के दिल में भी कुछ राज़ है …
टिप टिप करके गिरती ....  इठलाती बलखाती
कभी पत्तों को छूती
कभी शाख से नैना मिलाती …
बूँद की  कहानी का ये आगाज़ है
सूरज कि किरण से जुड़ जाने को
मन में ना ऐतराज़ है …
इंद्रधनुषी रंगों का असर
लगता कुछ ख़ास है
इसलिए मन कुछ लिख बैठा … क्यूंकि दिल की भी तो.…  .इक  आवाज़ है !!!!!



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